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	<title>Navratri Wishes &#8211; Pulse 24 News</title>
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		<title>Navratri Day 5: मां स्कंदमाता की पूजा विधि, व्रत कथा, शुभ रंग, भोग और मंत्र</title>
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		<dc:creator><![CDATA[DIVYA PAINULY]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 15 Oct 2026 10:11:09 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[भारत]]></category>
		<category><![CDATA[लेटेस्ट न्यूज़]]></category>
		<category><![CDATA[Maa Skandmata]]></category>
		<category><![CDATA[Navratri 2026]]></category>
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		<category><![CDATA[Skandmata Puja]]></category>
		<category><![CDATA[मां स्कंदमाता]]></category>
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					<description><![CDATA[Navratri Day 5: शारदीय नवरात्रि 2026 का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। आज, 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को नवरात्रि का पांचवां दिन है। नवरात्रि के पंचम दिवस पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता [&#8230;]]]></description>
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<p class="wp-block-paragraph">Navratri Day 5: शारदीय नवरात्रि 2026 का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। आज, 15 अक्टूबर 2026, गुरुवार को नवरात्रि का पांचवां दिन है। नवरात्रि के पंचम दिवस पर मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता मातृत्व, प्रेम, करुणा, ज्ञान और शक्ति का प्रतीक हैं। भक्त इस दिन विधि-विधान से मां की पूजा करके सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करते हैं। <br><br>मां स्कंदमाता को भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद की माता के रूप में जाना जाता है। देवी कमल के आसन पर विराजमान होती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। मान्यता है कि मां स्कंदमाता की आराधना करने से मन को शांति मिलती है और भक्तों को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा विधि, व्रत कथा, शुभ रंग, भोग, मंत्र और धार्मिक महत्व।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="739" height="415" src="https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/images-2026-10-15T153146.263.jpeg" alt="" class="wp-image-4026" srcset="https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/images-2026-10-15T153146.263.jpeg 739w, https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/images-2026-10-15T153146.263-300x168.jpeg 300w" sizes="(max-width: 739px) 100vw, 739px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">मां स्कंदमाता का स्वरूप और धार्मिक महत्व</h2>



<p class="wp-block-paragraph">मां स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत मनमोहक और ममतामयी है। देवी की चार भुजाएं हैं। उनके दो हाथों में कमल के फूल सुशोभित हैं, जबकि एक हाथ में वे अपने पुत्र भगवान स्कंद को धारण करती हैं। उनका चौथा हाथ भक्तों को आशीर्वाद देने की मुद्रा में रहता है। देवी का यह स्वरूप मां के वात्सल्य, प्रेम और करुणा को दर्शाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता की पूजा करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और बुद्धि, विवेक तथा आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। नवरात्रि के पांचवें दिन भक्त मां की आराधना करके अपने परिवार की सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करते हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">नवरात्रि के पांचवें दिन का शुभ रंग</h2>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व माना जाता है। पीला रंग आनंद, उत्साह, सकारात्मकता और समृद्धि का प्रतीक है। इस दिन भक्त पीले रंग के वस्त्र धारण कर सकते हैं और मां को पीले फूल अर्पित कर सकते हैं। हालांकि, शुभ रंग से जुड़ी परंपराएं क्षेत्र और स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।</p>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">मां स्कंदमाता की पूजा विधि</h2>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा तथा मां स्कंदमाता की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पूजा के दौरान इन चरणों का पालन कर सकते हैं:</p>



<ol start="1" class="wp-block-list">
<li>मां स्कंदमाता के सामने दीपक और धूप जलाएं।</li>



<li>देवी को पीले फूल, अक्षत, फल और सात्विक नैवेद्य अर्पित करें।</li>



<li>मां स्कंदमाता के मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।</li>



<li>मां दुर्गा की आरती करें और दुर्गा चालीसा या दुर्गा स्तुति का पाठ करें।</li>



<li>अंत में परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।</li>
</ol>



<p class="wp-block-paragraph">पूजा करते समय मन को शांत रखें और पूरी श्रद्धा के साथ मां का स्मरण करें। पूजा की विधि परिवार की परंपरा और स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार अपनाई जा सकती है।</p>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">मां स्कंदमाता का मंत्र</h2>



<p class="wp-block-paragraph">मां स्कंदमाता की पूजा के दौरान उनके मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। भक्त श्रद्धापूर्वक इस मंत्र का जाप कर सकते हैं:</p>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>ॐ देवी स्कन्दमातायै नमः॥</strong></p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके अलावा, मां की आराधना करते समय दुर्गा स्तुति, दुर्गा चालीसा और अन्य देवी मंत्रों का पाठ भी किया जा सकता है।</p>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">मां स्कंदमाता की व्रत कथा</h2>



<p class="wp-block-paragraph">पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, मां स्कंदमाता देवी दुर्गा का पांचवां स्वरूप हैं। वे भगवान कार्तिकेय की माता हैं, जिन्हें स्कंद के नाम से भी जाना जाता है। भगवान स्कंद को देवताओं के सेनापति के रूप में जाना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब असुरों के अत्याचार बढ़ने लगे और देवताओं के सामने संकट उत्पन्न हुआ, तब भगवान स्कंद ने देवताओं की रक्षा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मां स्कंदमाता का स्वरूप इसी दिव्य मातृत्व और शक्ति का प्रतीक माना जाता है।<br>मां अपने पुत्र को गोद में धारण करके भक्तों को यह संदेश देती हैं कि प्रेम, करुणा और शक्ति एक-दूसरे के पूरक हैं। देवी का स्वरूप मातृत्व की महिमा के साथ-साथ साहस और धर्म की रक्षा का भी प्रतीक है।<br>धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के पांचवें दिन मां स्कंदमाता की श्रद्धापूर्वक पूजा और कथा का पाठ करने से भक्तों को मानसिक शांति, सकारात्मकता और आत्मबल की प्रेरणा मिलती है। व्रत रखने वाले श्रद्धालु अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मां की पूजा और कथा का पाठ कर सकते हैं।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="576" src="https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/6acfc28e3e82f-skandmata-14573317-1024x576.jpeg" alt="" class="wp-image-4027" srcset="https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/6acfc28e3e82f-skandmata-14573317-1024x576.jpeg 1024w, https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/6acfc28e3e82f-skandmata-14573317-300x169.jpeg 300w, https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/6acfc28e3e82f-skandmata-14573317-768x432.jpeg 768w, https://pulse24news.com/wp-content/uploads/2026/10/6acfc28e3e82f-skandmata-14573317.jpeg 1200w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">मां स्कंदमाता की पूजा का शुभ समय</h2>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि के पांचवें दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का निर्धारण स्थानीय पंचांग के अनुसार किया जाता है। 15 अक्टूबर 2026 के लिए प्रचलित पंचांग विवरण में निम्न समय बताए गए हैं:</p>



<ul class="wp-block-list">
<li><strong>ब्रह्म मुहूर्त:</strong> सुबह 4:42 बजे से 5:32 बजे तक</li>



<li><strong>अभिजीत मुहूर्त:</strong> सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक</li>



<li><strong>गोधूलि मुहूर्त:</strong> शाम 5:52 बजे से 6:17 बजे तक</li>
</ul>



<p class="wp-block-paragraph">ध्यान दें कि ये समय स्थान के अनुसार बदल सकते हैं। अपने शहर में पूजा का सही मुहूर्त जानने के लिए स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।</p>



<h2 class="wp-block-heading has-medium-font-size">मां स्कंदमाता की पूजा से जुड़ी मान्यताएं</h2>



<p class="wp-block-paragraph">नवरात्रि के इस पावन अवसर पर अपने परिवार, मित्रों और प्रियजनों को मां स्कंदमाता के आशीर्वाद से भरी शुभकामनाएं भेजें।</p>



<ul class="wp-block-list">
<li>मां स्कंदमाता आपके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आएं।</li>



<li>मां की कृपा से आपके परिवार में प्रेम, खुशहाली और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहे।</li>



<li>मां स्कंदमाता आपको ज्ञान, विवेक, साहस और सफलता का आशीर्वाद दें।</li>



<li>नवरात्रि का यह पावन दिन आपके जीवन में नई उम्मीदें और खुशियां लेकर आए।</li>
</ul>
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