
देहरादून: गंगा और जलस्रोतों के संरक्षण को लेकर देहरादून में गंगा समग्र की ओर से विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत मां गंगा के समक्ष दीप प्रज्वलन और गंगा गीत के साथ हुई। इस दौरान वक्ताओं ने गंगा संरक्षण के साथ-साथ सहायक नदियों, गधेरों, तालाबों, पोखरों और अन्य छोटे जलस्रोतों को बचाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता, संस्कृति और करोड़ों लोगों की आस्था का आधार है। गंगा को निर्मल और अविरल बनाए रखने के लिए केवल मुख्य धारा पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए गंगा से जुड़ी सहायक नदियों और स्थानीय जलस्रोतों का संरक्षण भी जरूरी है।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के पर्यावरण संरक्षण मंत्री राम सिंह केड़ा, आरएसएस के प्रांत प्रचारक डॉ. शैलेंद्र कुमार, गंगा समग्र के राष्ट्रीय संगठन मंत्री रामाशीष, आईएमए ब्लड बैंक के राष्ट्रीय अध्यक्ष डी.डी. चौधरी सहित विभिन्न पदाधिकारी और प्रबुद्ध नागरिक मौजूद रहे।
जलस्रोतों का संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी
वक्ताओं ने जलस्रोतों के लगातार सूखने, प्रदूषण और अतिक्रमण को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि जल और पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों के माध्यम से जलस्रोतों को पुनर्जीवित और संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए लोगों को अपने आसपास मौजूद प्राकृतिक जलस्रोतों की पहचान कर उनके संरक्षण की दिशा में पहल करनी चाहिए।

युवाओं से ‘भागीरथ संकल्प’ से जुड़ने की अपील
कार्यक्रम के दौरान युवाओं से ‘भागीरथ संकल्प’ से जुड़ने का आह्वान किया गया। लोगों से अपील की गई कि वे अपने घर, गांव और मोहल्ले के आसपास मौजूद जलस्रोतों को बचाने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर पहल करें।
आयोजकों ने कहा कि गंगा संरक्षण के किसी भी अभियान की सफलता जनभागीदारी पर निर्भर करती है। यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने आसपास मौजूद एक जलस्रोत को बचाने का संकल्प ले, तो यह प्रयास व्यापक जल संरक्षण अभियान का रूप ले सकता है।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि “गंगा बचेगी तो जीवन बचेगा और जल बचेगा तो भविष्य सुरक्षित रहेगा।” गंगा संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के लिए समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी को जरूरी बताया गया।

