नैनीताल में बाइक पर ₹100 टोल का बवाल, पहले ही दिन अधिवक्ताओं का हंगामा, वसूली रुकवाई

उत्तराखंड

नगर पालिका की नई टोल व्यवस्था का विरोध तेज, बार एसोसिएशन ने इसे जनता का शोषण बताया; आंदोलन की चेतावनी के बाद फिलहाल दोपहिया वाहनों से शुल्क वसूली पर रोक

नैनीताल में नगर पालिका द्वारा दोपहिया वाहनों से टोल वसूली शुरू होते ही विवाद खड़ा हो गया। नई व्यवस्था के पहले ही दिन बार एसोसिएशन के अधिवक्ता सड़क पर उतर आए और जमकर विरोध प्रदर्शन किया। अधिवक्ताओं ने दोपहिया वाहनों से ₹100 टोल वसूली को आम जनता और बाहर से आने वाले लोगों का आर्थिक शोषण बताते हुए तत्काल इसे बंद करने की मांग की।

दरअसल, नगर पालिका ने हाल ही में लेक ब्रिज चुंगी का टेंडर नोएडा की एक कंपनी को दिया है। टेंडर लागू होने के बाद तल्लीताल रिक्शा स्टैंड, फांसी गधेरा और बारापत्थर चुंगी पर नई दरों के अनुसार दोपहिया वाहनों से भी ₹100 शुल्क वसूला जाने लगा। जैसे ही जिला न्यायालय जा रहे अधिवक्ताओं से टोल मांगा गया, मामला गरमा गया।

सूचना मिलते ही बार एसोसिएशन के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में अधिवक्ता चुंगी स्थल पर पहुंच गए। उन्होंने नारेबाजी करते हुए टोल वसूली का विरोध किया और बैरिकेडिंग तक हटा दी। विरोध बढ़ता देख टोल संचालक ने अधिवक्ताओं को समझाने की कोशिश की, लेकिन वे अपनी मांग पर अड़े रहे। आखिरकार टोल कर्मियों ने फिलहाल दोपहिया वाहनों से शुल्क नहीं लेने का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शन शांत हुआ।

बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण बिष्ट ने कहा कि नगर पालिका की यह व्यवस्था पूरी तरह मनमानी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर के प्रमुख प्रवेश स्थलों को बाहरी कंपनी के हवाले कर जनता से अवैध वसूली की जा रही है। उन्होंने व्यापार मंडल समेत सभी सामाजिक संगठनों से इस मुद्दे पर एकजुट होने की अपील की।

बार एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि शुक्रवार को इस मुद्दे पर बैठक होगी। यदि नगर पालिका ने दोपहिया वाहनों से टोल वसूली का फैसला वापस नहीं लिया, तो आंदोलन और धरना-प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। फिलहाल अधिवक्ताओं के विरोध के बाद फांसी गधेरा चुंगी पर दोपहिया वाहनों से टोल वसूली रोक दी गई है।