नरेंद्र मोदी : नेतृत्व से जनभागीदारी तक, बदलते भारत की 25 वर्षों की यात्रा
हजारीबाग/Ashok Banty Raj
हर कार्य की सफलता और उससे प्राप्त समृद्धि के लिए एक निश्चित व्यवस्था, स्पष्ट लक्ष्य और उसके अनुरूप निरंतर प्रयास की आवश्यकता होती है। शासन और राजनीति में यह आवश्यकता और भी बढ़ जाती है, क्योंकि यहां किसी एक व्यक्ति के निर्णय का प्रभाव करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ता है। हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन को इसी दृष्टि से देखें तो उनके व्यक्तित्व की एक प्रमुख विशेषता सामने आती है वो है किसी विचार को लक्ष्य, लक्ष्य को अभियान और अभियान को जनभागीदारी में बदलने की प्रबंधकीय क्षमता।
17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में जन्मे नरेंद्र दामोदरदास मोदी 76 वर्ष की आयु में प्रवेश कर रहे हैं। इस जन्मदिन का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है कि 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई उनकी संवैधानिक नेतृत्व-यात्रा 2026 में 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन का पड़ाव पूरा कर रही है। 2014 में देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद वे 2019 और 2024 में लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने।
नमो सिर्फ एक नाम नहीं , एक विशेष कार्यशैली का हैं प्रबंधकीय उदाहरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजनीतिक सफर को केवल चुनावी सफलता के आंकड़ों से समझना अधूरा होगा। उनके नेतृत्व की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने प्रशासनिक योजनाओं को बड़े सामाजिक अभियानों का रूप देने का प्रयास किया। स्वच्छता से लेकर डिजिटल भुगतान तक, जनधन से लेकर जनभागीदारी तक और स्टार्टअप से लेकर आत्मनिर्भरता तक इन अभियानों के पीछे एक समान कार्यशैली दिखाई देती है। लक्ष्य तय करना, उसे सरल भाषा में जनता तक पहुंचाना, तकनीक का इस्तेमाल करना और परिणामों को आंकड़ों के माध्यम से मापना। यही वह प्रबंधकीय दृष्टिकोण है, जिसकी ओर मैंने वर्षों पहले अपने एक आलेख में संकेत किया था कि “नमो ने अपने कुशल प्रबंधकीय कौशल व मैनेजमेंट क्षमता से दुनिया में बजाया हिंदुस्तान का डंका।” समय के साथ उस विचार का दायरा और व्यापक हुआ है।
आज इसका मूल्यांकन केवल भाषण-कला या राजनीतिक लोकप्रियता हटकर उनके शासन में आए संरचनात्मक बदलावों और उपलब्ध आंकड़ों से भी किया जा सकता है।
जनधन से डिजिटल भारत तक, आंकड़ों में आया व्यापक बदलाव
2014 में शुरू हुई प्रधानमंत्री जनधन योजना इसका बड़ा उदाहरण है। अगस्त 2026 तक 59.09 करोड़ जनधन खाते खुल चुके हैं। इनमें 32.92 करोड़ महिला खाताधारक हैं और 45.95 करोड़ खाते ग्रामीण एवं अर्धशहरी क्षेत्रों में हैं। इन खातों में जमा राशि लगभग 3.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। 2015 में जहां खातों की संख्या 14.72 करोड़ थी, वहीं 2026 में यह लगभग चार गुना हो गई।
इसके साथ डिजिटल भुगतान ने भारतीय अर्थव्यवस्था के व्यवहार को ही बदल दिया। एनपीसीआई के अनुसार अगस्त 2026 में यूपीआई पर 24,508.96 मिलियन यानी करीब 2,450.9 करोड़ लेन-देन हुए, जिनका मूल्य लगभग 29.82 लाख करोड़ रुपये रहा। यह आंकड़ा सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि भारत के छोटे दुकानदार, रेहड़ी-पटरी वाले, ग्रामीण उपभोक्ता और सामान्य परिवार के रोजमर्रा के आर्थिक व्यवहार में आए बदलाव का संकेत है।
सड़क से स्टार्टअप तक, दिखता है बदलते भारत का ढांचा
मोदी सरकार के 12 वर्षों के दौरान बुनियादी ढांचे पर दिए गए विशेष ध्यान भी शासन की प्रमुख पहचान बना। सरकार द्वारा जून 2026 में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार देश में 1.45 लाख किलोमीटर सड़क नेटवर्क, 3,000 किलोमीटर से अधिक आधुनिक एक्सप्रेसवे, 90 से अधिक नए हवाई अड्डे और 140 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें जैसे विस्तार दर्ज किए गए हैं। इसी प्रस्तुति में चार करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को पक्के आवास और 50 करोड़ लोगों को पांच लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा कवरेज का भी उल्लेख किया गया।
इसी दौर में भारत के युवा मानस में भी एक परिवर्तन दिखाई देता है। 2016 में शुरू हुआ स्टार्टअप इंडिया अब केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं रहा। जनवरी 2026 तक डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप की संख्या 2.12 लाख से अधिक हो चुकी थी और इनमें एक लाख से अधिक ऐसे उपक्रम थे जिनमें कम-से-कम एक महिला निदेशक या भागीदार थी। जून 2026 के सरकारी आंकड़ों में स्टार्टअप की संख्या 2.3 लाख से अधिक और उनसे जुड़े रोजगार करीब 23 लाख से अधिक बताए गए। यहां मोदी के प्रबंधकीय कौशल का एक और पहलू सामने आता है। देश के युवा को सिर्फ रोजगार मांगने वाला नहीं बल्कि रोजगार पैदा करने वाला बनाने का प्रयास किया गया।
कल्याण और विकास को साथ लेकर चलने की चुनौती
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की चर्चा में गरीब कल्याण को अलग और विकास को अलग करके नहीं देखा जा सकता। निःशुल्क खाद्यान्न, आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, जनधन, मुद्रा, स्वनिधि जैसी योजनाओं ने राज्य की कल्याणकारी भूमिका को नए तरीके से प्रस्तुत किया है।
सरकार के अनुसार अगस्त 2026 तक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत 59.14 करोड़ से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके थे। वहीं पीएम स्वनिधि के तहत 78.17 लाख लाभार्थियों को 12 अगस्त 2026 तक 18,971 करोड़ रुपये से अधिक के ऋण वितरित किए गए। इन आंकड़ों की असली सफलता तभी मानी जाएगी जब योजना का अंतिम परिणाम उस व्यक्ति के जीवन में दिखाई दे, जिसके लिए योजना बनाई गई थी। यही वह कसौटी है जिस पर आने वाले वर्षों में मोदी मॉडल का मूल्यांकन और अधिक कठोरता से होगा।
दुनिया के सामने भारत की बनी नई छवि
मोदी के नेतृत्व में विदेश नीति और वैश्विक मंच पर भारत की सक्रियता भी बढ़ी है। आज भारत केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था का बड़ा बाजार भर नहीं है डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, अंतरिक्ष, स्टार्टअप, विनिर्माण, ऊर्जा, कूटनीति और वैश्विक दक्षिण के विमर्श में भी अपनी भूमिका मजबूत करने का प्रयास कर रहा है। हालांकि किसी भी राष्ट्र की शक्ति को महज अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दिखाई देने से नहीं मापी जा सकती। उसका वास्तविक आधार घरेलू अर्थव्यवस्था, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादकता और सामाजिक समरसता है। इसलिए प्रधानमंत्री के 76वें जन्मदिन पर उपलब्धियों की चर्चा के साथ आगामी दशक की चुनौतियों पर बात करना भी उतना ही आवश्यक है। हाल ही में नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में संपन्न हुआ 18 बाँ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उपलब्धियां से भरा रहा। इसमें आतंकवाद के खिलाफ स्पष्ट रुख दिखा, स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा, एआई और डिजिटल तकनीक पर सहयोग, स्वास्थ्य क्षेत्र में नई पहल, कृषि और खाद्य सुरक्षा पर विशेष जोर, ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने पर विशेष ध्यान, भारत-चीन संवाद पर महत्वपूर्ण अवसर जैसे कई ज्वलंत और व्यावहारिक विषयों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। दुनिया ने भारत के बढ़ते कदम और उन्नत दौर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के माध्यम से बेहद करीब से देखा और जाना ।
आगे की राह पहले से बड़ी है
भारत अब उस दौर में पहुंच चुका है जहां केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं होगी। युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण रोजगार, उच्च शिक्षा और कौशल, किसानों की आय एवं उत्पादकता, छोटे शहरों में स्वास्थ्य सुविधाएं, सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता, न्याय तक आसान पहुंच और पर्यावरणीय संतुलन ये ऐसे प्रश्न हैं जिनका समाधान आने वाले वर्षों के भारत की दिशा तय करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी यही अगली बड़ी परीक्षा है कि जिस प्रशासनिक क्षमता से उन्होंने योजनाओं को राष्ट्रीय अभियान बनाया, उसी क्षमता से वे भारत की अगली पीढ़ी की आकांक्षाओं को अवसर में बदलें। क्योंकि 25 वर्ष का सार्वजनिक जीवन किसी भी नेता के लिए उत्सव से अधिक उनके आत्ममंथन का अवसर भी होता है।
नमो की नए भारत की परिकल्पना
पुराने आलेख में मैंने लिखा था कि एक छोटे से स्थान से निकलकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक का सफर करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा हो सकता है। आज 25 वर्ष बाद उस पंक्ति का अर्थ और गहरा हो गया है। नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी राजनीतिक उपलब्धि को यदि एक वाक्य में परिभाषित करना हो तो कहा जा सकता है कि उन्होंने शासन को सरकारी तंत्र की गतिविधि न रहने देकर उसे जन-अभियान में बदलने की भरसक कोशिश की। जनधन के 59 करोड़ से अधिक खाते, अगस्त 2026 में यूपीआई के करीब 2,451 करोड़ मासिक लेन-देन, 2.12 लाख से अधिक डीपीआईआईटी -मान्यता प्राप्त स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विस्तार के आंकड़े इस परिवर्तन की अलग-अलग तस्वीरें प्रस्तुत करते हैं। लेकिन इतिहास अंततः आंकड़ों से आगे जाता है। वह यह पूछता है कि क्या सामान्य भारतीय का जीवन बदला? क्या अवसर बढ़े? क्या गरीब का आत्मविश्वास बढ़ा? क्या युवा अपने भविष्य को लेकर अधिक आश्वस्त हुआ? क्या भारत ने दुनिया में अपनी जगह को नए आत्मविश्वास के साथ परिभाषित किया? इन प्रश्नों के उत्तर ही नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन की स्थायी विरासत तय करेंगे।
76वें जन्मदिन पर इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सिर्फ शुभकामना देना पर्याप्त नहीं लगता। शुभकामना के साथ एक अपेक्षा भी होनी चाहिए। भारत की विकास यात्रा का अगला अध्याय और अधिक समावेशी हो, विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे, युवा शक्ति को अवसर मिले, तकनीक मानवीय जीवन को सरल बनाए और ‘विकसित भारत’ का संकल्प कागज से निकलकर प्रत्येक भारतीय के जीवन का अनुभव बने। क्योंकि अंततः किसी भी नेता की सबसे बड़ी उपलब्धि यह नहीं होती कि उसके नाम की चर्चा कितने वर्षों तक होती रही। सबसे बड़ी उपलब्धि यह होती है कि उसके नेतृत्व में देश की आने वाली पीढ़ियां अपने भविष्य को कितना बेहतर देख पाईं। हम देशवासियों खासकर युवापीढ़ी को नमो के सार्वजनिक जीवन से प्रेरित होकर उनके सपने को साकार करने में अपना योगदान समाज में जरूर देना चाहिए। हमें अपने दैनिक दिनचर्या में कुछ समय निकालकर समाजहित में खपाना चाहिए। हमें अपने भावी पीढ़ी को भी इस ओर प्रेरित करना चाहिए तभी उनके सपने साकार होंगे और हम आने वाले 2047 तक देश को विकसित भारत बनाने में कारगर हो पाएंगे ।
नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर यही शुभकामना है कि भारत का आत्मविश्वास बढ़े, भारत की क्षमता बढ़े और भारत के सामान्य नागरिक की आशा और आकांक्षा उससे भी तेज गति से बढ़े। हम पीएम नरेंद्र मोदी के यशस्वी और दीर्घायु जीवन की ईश्वर से कामना करते हैं ।


