
भारत-चीन सीमा को लेकर एक बार फिर सियासी बहस तेज हो गई है। अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास चीनी सेना की कथित गतिविधियों और भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग को लेकर AIMIM प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। ओवैसी ने सवाल उठाया है कि अगर सीमा पर वास्तव में ऐसी गतिविधियां हो रही हैं तो सरकार देश को इसकी पूरी जानकारी क्यों नहीं दे रही है।
हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना की नई घुसपैठ का दावा अभी विवादित है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, सरकार से जुड़े सूत्रों ने अरुणाचल में चीन की ओर से किसी नए अतिक्रमण के दावे को खारिज किया है। अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने भी ऐसी किसी घुसपैठ की जानकारी से इनकार किया था।
ओवैसी ने सरकार से पूछे 5 बड़े सवाल
1. क्या चीनी सेना ने भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग रोकी?
ओवैसी ने सरकार से पूछा है कि क्या चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीमों को उन इलाकों में जाने से रोका है, जहां जवान पहले नियमित रूप से गश्त करते रहे हैं।
2. क्या भारतीय सेना के बनाए अस्थायी ढांचे को नष्ट किया गया?
ओवैसी का दूसरा सवाल यह है कि क्या चीनी सैनिकों ने भारतीय सेना की पेट्रोलिंग टीम की ओर से बनाए गए किसी अस्थायी ढांचे को नुकसान पहुंचाया या उसे नष्ट किया है।
3. क्या चीन ने भारतीय क्षेत्र में टेंट लगाए हैं?
ओवैसी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या चीन ने उन इलाकों में टेंट लगाए हैं, जहां पहले भारतीय पेट्रोलिंग टीमें नियमित रूप से जाती थीं और जिन्हें भारत अपना क्षेत्र मानता है।
4. क्या सरकार सीमा की वास्तविक स्थिति देश से छिपा रही है?
AIMIM प्रमुख का कहना है कि सरकार की ओर से अब तक दी गई जानकारी पर्याप्त और स्पष्ट नहीं है। उन्होंने केंद्र से मांग की कि अरुणाचल सीमा पर जमीनी स्थिति को लेकर देश को साफ-साफ जानकारी दी जाए।
5. क्या चीन के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए उसकी शर्तें मानी गई हैं?
ओवैसी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्रस्तावित भारत यात्रा को भी सीमा विवाद से जोड़ते हुए सवाल उठाया है। उन्होंने पूछा कि अगर सीमा पर चीनी गतिविधियों को लेकर ऐसे आरोप हैं, तो भारत चीन के साथ रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में आगे क्यों बढ़ रहा है और क्या इसके लिए बीजिंग की कोई शर्त स्वीकार की गई है।
सरकार का क्या कहना है?
अरुणाचल प्रदेश में कथित चीनी गतिविधियों को लेकर सरकार से जुड़े सूत्रों ने नए अतिक्रमण के दावों को खारिज किया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि भारतीय सेना और ITBP सीमा पर स्थिति पर नजर रख रहे हैं और किसी भी गतिविधि का मुकाबला करने के लिए तैयार हैं।
वहीं, विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारत-चीन सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बेहद महत्वपूर्ण है। मंत्रालय के मुताबिक, सीमा से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत के माध्यमों से चर्चा जारी है और सीमा की स्थिति का असर दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ता है।
क्यों महत्वपूर्ण है अरुणाचल बॉर्डर का मुद्दा?
अरुणाचल प्रदेश लंबे समय से भारत और चीन के बीच सीमा विवाद का संवेदनशील क्षेत्र रहा है। हालिया विवाद ऐसे समय सामने आया है जब सीमा पर चीन की गतिविधियों, पेट्रोलिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर राजनीतिक दल सरकार से ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर इस मुद्दे से जुड़े कुछ पुराने वीडियो भी हाल में वायरल हुए हैं। PIB Fact Check के अनुसार, एक वायरल वीडियो को अरुणाचल प्रदेश की हालिया घटना बताकर शेयर किया गया था, जबकि वह पुराना वीडियो भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र से संबंधित था। इसलिए सीमा से जुड़ी किसी भी वायरल तस्वीर या वीडियो को सत्यापित किए बिना सही मानना उचित नहीं होगा।
अरुणाचल प्रदेश में चीन की कथित घुसपैठ को लेकर फिलहाल दावा और आधिकारिक पक्ष अलग-अलग हैं। ओवैसी ने सरकार से सीमा की स्थिति पर स्पष्ट जवाब मांगा है, जबकि सरकारी पक्ष से नए चीनी अतिक्रमण के दावों को खारिज किया गया है।
ऐसे में सबसे अहम सवाल यही है कि अरुणाचल की LAC पर वास्तविक जमीनी स्थिति क्या है और भारतीय जवानों की पेट्रोलिंग को लेकर कोई नई पाबंदी या बदलाव हुआ है या नहीं। आने वाले दिनों में सरकार या सेना की ओर से अधिक स्पष्ट जानकारी इस विवाद की तस्वीर साफ कर सकती है।

