
देहरादून, 26 जुलाई। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का रविवार सुबह निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। देर रात सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें देहरादून स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनका निधन हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण हुआ।
देहरादून, 26 जुलाई। उत्तराखंड कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट का रविवार सुबह निधन हो गया। वह 81 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। देर रात सीने में दर्द की शिकायत के बाद उन्हें देहरादून स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, उनका निधन हृदयाघात (हार्ट अटैक) के कारण हुआ।सत्तर के दशक में छात्र राजनीति से अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत करने वाले हीरा सिंह बिष्ट ने जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। वे कई बार विधायक चुने गए और अपने सरल स्वभाव, जनसंपर्क तथा संगठन के प्रति समर्पण के कारण कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में विशेष स्थान रखते थे। वर्ष 2022 का विधानसभा चुनाव भी उन्होंने रायपुर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में लड़ा था और अंतिम समय तक पार्टी की गतिविधियों में सक्रिय रहे।
उनके निधन की खबर मिलते ही कांग्रेस कार्यकर्ताओं और समर्थकों में शोक की लहर दौड़ गई। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत सहित अनेक राजनीतिक दलों के नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे उत्तराखंड की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति बताया। नेताओं ने कहा कि हीरा सिंह बिष्ट का पूरा जीवन जनता की सेवा, कांग्रेस संगठन को मजबूत करने और श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए समर्पित रहा।निधन का विवरण
स्वास्थ्य: वे पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे
निधन की तिथि: 26 जुलाई 2026 (रविवार)
आयु: 81 वर्ष
कारण: हार्ट अटैक / हृदय गति रुकना
प्रारंभिक जीवन एवं शिक्षा
- जन्म उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के एक सामान्य परिवार में हुआ।
- उच्च शिक्षा देहरादून से प्राप्त की।
- उन्होंने एम.ए. और एलएलबी की पढ़ाई की तथा पेशे से अधिवक्ता (वकील) भी रहे।
राजनीतिक सफर
हीरा सिंह बिष्ट का राजनीतिक जीवन चार दशक से अधिक लंबा रहा है।
मुख्य पड़ाव:
- 1985 में उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए पहली बार विधायक चुने गए।
- उत्तराखंड राज्य गठन के बाद 2002 में पहली विधानसभा के सदस्य बने।
- 2014 के उपचुनाव में डोईवाला विधानसभा सीट से जीतकर तीसरी बार विधायक बने।
- वे उत्तराखंड कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में लगातार सक्रिय रहे हैंपूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:
- परिवहन विभाग
- श्रम विभाग
- तकनीकी शिक्षा विभाग
- इन विभागों में उन्होंने प्रशासनिक सुधार, श्रमिक कल्याण और तकनीकी शिक्षा के विस्तार से जुड़े कार्य किएपूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी के मंत्रिमंडल में उन्हें कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी मिली, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे:राजनीति के अलावा उन्होंने खेलों, विशेषकर क्रिकेट के विकास में भी योगदान दिया।
- वे क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के संस्थापक सदस्यों में रहे।
- देहरादून के रायपुर क्रिकेट स्टेडियम के लिए भूमि आवंटन की प्रक्रिया में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। बाद में यह स्टेडियम अंतरराष्ट्रीय स्तर का क्रिकेट मैदान बना।वे इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC) उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। कांग्रेस संगठन में उन्होंने लंबे समय तक विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।उन्होंने विभिन्न चुनावों में अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ा।
- 1985 – देहरादून से विधायक निर्वाचित
- 2002 – राजपुर विधानसभा से विधायक
- 2014 – डोईवाला विधानसभा उपचुनाव में विजयी
- 2022 – रायपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा।


