11 वर्षीय भारतीय मूल की बोधना शिवानंदन बनीं इंग्लैंड की नंबर-1 महिला शतरंज खिलाड़ी

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भारतीय मूल की 11 वर्षीय शतरंज प्रतिभा बोधना शिवानंदन ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। नवीनतम फिडे (FIDE) रेटिंग सूची के अनुसार बोधना इंग्लैंड की शीर्ष रैंकिंग महिला शतरंज खिलाड़ी बन गई हैं। महज 11 वर्ष की आयु में उन्होंने 2366 की रेटिंग हासिल कर कई अनुभवी खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया है।

बोधना के माता-पिता भारतीय मूल के हैं और उनका परिवार तमिलनाडु से संबंध रखता है। उनका जन्म और पालन-पोषण लंदन में हुआ। उन्होंने वर्ष 2020 में कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान शतरंज खेलना शुरू किया था। कुछ ही वर्षों में उन्होंने अपनी असाधारण प्रतिभा, रणनीतिक सोच और निरंतर मेहनत के दम पर विश्व शतरंज में अपनी अलग पहचान बना ली।

बोधना की सफलता केवल इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। वह पहली बार विश्व की शीर्ष 100 महिला खिलाड़ियों में भी शामिल हुई हैं। इससे पहले वह कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर चुकी हैं और पूर्व महिला विश्व चैंपियन ग्रैंडमास्टर मारिया मुज़ीचुक जैसी दिग्गज खिलाड़ी को भी पराजित कर चुकी हैं।

उनकी इस उपलब्धि पर ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री ऋषि सुनक सहित अनेक खेल हस्तियों और इंग्लिश चेस फेडरेशन ने बधाई दी है। इंग्लिश चेस फेडरेशन के अधिकारियों ने कहा कि बोधना आने वाली पीढ़ी के खिलाड़ियों, विशेषकर लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई हैं।कम उम्र में मिली इस बड़ी सफलता ने बोधना शिवानंदन को विश्व शतरंज की सबसे होनहार युवा खिलाड़ियों में शामिल कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उनका प्रदर्शन इसी तरह जारी रहा तो आने वाले वर्षों में वह विश्व शतरंज की शीर्ष खिलाड़ियों में अपनी जगह बना सकती हैं।