
समाजवादी पार्टी ने गोरखपुर में सामने आए थप्पड़ और मारपीट के विवाद को गंभीरता से लेते हुए बड़ा संगठनात्मक एक्शन लिया है। पार्टी ने नेता अंशुमान सिंह को निष्कासित कर दिया है। इसके साथ ही गोरखपुर की जिला और महानगर इकाई के अलावा सभी फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियों को भी तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कुर्सी को लेकर हुआ था विवाद
पूरा विवाद गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित समाजवादी पार्टी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ। बताया गया कि कार्यक्रम के दौरान बैठने के लिए कुर्सी को लेकर पूर्व जिला अध्यक्ष राम नगीना साहनी और अंशुमान सिंह के समर्थकों के बीच कहासुनी शुरू हुई।
देखते ही देखते विवाद हाथापाई तक पहुंच गया। इस दौरान अंशुमान सिंह के बेटे कमलेश सिंह पर राम नगीना साहनी को थप्पड़ मारने का आरोप लगा। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसके बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया।
अंशुमान सिंह पर सपा की कार्रवाई
विवाद के बाद समाजवादी पार्टी ने अंशुमान सिंह को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निष्कासित कर दिया। इसके बाद पार्टी नेतृत्व ने गोरखपुर के संगठन को लेकर भी बड़ा फैसला लिया।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर गोरखपुर की जिला कार्यकारिणी, महानगर कार्यकारिणी और विभिन्न फ्रंटल संगठनों की कार्यकारिणियों को भंग कर दिया गया है। पार्टी की ओर से इस संबंध में आधिकारिक आदेश भी जारी किया गया।
विवाद के बाद राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री संजय निषाद ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने अंशुमान सिंह और उनके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए सपा नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में सपा कार्यालय के घेराव की चेतावनी भी दी थी।
पुलिस केस भी दर्ज
इस विवाद को लेकर पुलिस में भी शिकायतें दर्ज हुई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रेस क्लब की घटना के संबंध में सपा नेताओं समेत कई लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। वहीं राम नगीना साहनी की शिकायत पर भी अंशुमान सिंह, उनके बेटों और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है।
2027 चुनाव से पहले बड़ा संगठनात्मक झटका
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर जैसे अहम जिले में पार्टी की पूरी जिला-महानगर इकाई को भंग किया जाना सपा के लिए बड़ा संगठनात्मक फैसला माना जा रहा है। अब पार्टी को नए सिरे से जिला और महानगर संगठन तैयार करना होगा।
फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने गोरखपुर की स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है और आने वाले दिनों में पार्टी की नई कार्यकारिणी के गठन पर नजर रहेगी।
