मां कूष्मांडा

Navratri Day 4: शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कूष्मांडा की पूजा- जानें विधि, प्रिय भोग और मंत्र

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Navratri Day 4: आज 14 अक्टूबर, बुधवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां कूष्मांडा की उपासना से सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है। आज आयुष्मान योग रात 8 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। आइए जानते हैं आज की तिथि, नक्षत्र, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

मां कूष्मांडा की पूजा का महत्व

शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि मां कूष्मांडा ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी, इसलिए उन्हें सृष्टि की आदिशक्ति के रूप में भी पूजा जाता है। देवी की आठ भुजाओं में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र, गदा और माला सुशोभित हैं। नवरात्रि के इस दिन भक्त सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण कर मां की पूजा करते हैं। देवी को पुष्प, धूप, दीप और फल अर्पित किए जाते हैं। श्रद्धालु सुख-समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना के साथ मां कूष्मांडा का आशीर्वाद लेते हैं।

आज के शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आज आयुष्मान योग रात 8 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। इसके बाद सौभाग्य योग शुरू होगा। वहीं, अमृत काल शाम 4 बजकर 38 मिनट से शाम 6 बजकर 23 मिनट तक रहेगा।

  • अमृत काल: शाम 4:38 बजे से शाम 6:23 बजे तक
  • आयुष्मान योग: रात 8:39 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार आज नहीं है।

धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए शुभ समय का चयन करते समय स्थानीय पंचांग और पूजा की परंपरा का ध्यान रखना चाहिए।

राहुकाल और अशुभ समय

बुधवार को राहुकाल दोपहर के समय रहेगा। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचा जाता है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और धार्मिक गतिविधियां की जा सकती हैं।

  • राहुकाल: दोपहर 12:07 बजे से 1:33 बजे तक
  • गुलिकाल: सुबह 10:40 बजे से दोपहर 12:07 बजे तक
  • यमगण्ड: सुबह 7:48 बजे से 9:14 बजे तक

सूर्य और चंद्रमा की स्थिति

आज सूर्य देव कन्या राशि में स्थित रहेंगे, जबकि चंद्रमा वृश्चिक राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषीय मान्यताओं में ग्रहों की स्थिति को दैनिक पंचांग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पूजा-पाठ, व्रत और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए कई लोग तिथि, योग और ग्रहों की स्थिति के आधार पर दिन की योजना बनाते हैं।

अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव

आज चंद्रमा अनुराधा नक्षत्र में रहेंगे। यह नक्षत्र 15 अक्टूबर की सुबह 4 बजकर 3 मिनट तक रहेगा, जिसके बाद ज्येष्ठा नक्षत्र शुरू होगा। अनुराधा नक्षत्र के स्वामी शनिदेव और राशि स्वामी मंगल माने जाते हैं। इसके देवता मित्र हैं, जिन्हें मित्रता, सहयोग और तालमेल का प्रतीक माना जाता है। अनुराधा नक्षत्र का प्रतीक कमल का फूल है। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इस नक्षत्र को अनुशासन, मेहनत, मित्रता और संबंधों में सामंजस्य से जोड़ा जाता है।

आज का पंचांग क्यों है खास?

14 अक्टूबर 2026 को चतुर्थी तिथि, आयुष्मान योग और अनुराधा नक्षत्र का संयोग दिन को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बनाता है। नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की पूजा के साथ भक्त देवी दुर्गा से सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। शुभ मुहूर्त, राहुकाल और नक्षत्र की जानकारी के आधार पर श्रद्धालु अपनी दैनिक धार्मिक गतिविधियों की योजना बना सकते हैं।